हरियाणा के VIP इलाकों में बाढ़ : CM गृहक्षेत्र में 3 बार टूटी मारकंडा, विज का एरिया 4 दिन से डूबा; श्रुति के जिले में 1 माह से जलभराव

हरियाणा में इस बार यमुना, मारकंडा, घग्गर व टांगरी के अलावा कई बरसाती नदियां व ड्रेन आफत लेकर आईं। प्रदेश के करीब 3,060 गांवों में बाढ़-बारिश से जलभराव हुआ। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर ही 1.84 लाख किसानों ने करीब 11 लाख एकड़ फसलों में नुकसान बता मुआवजा मांगा है। हालांकि, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी

हरियाणा के VIP इलाकों में बाढ़ : CM गृहक्षेत्र में 3 बार टूटी मारकंडा, विज का एरिया 4 दिन से डूबा; श्रुति के जिले में 1 माह से जलभराव

हरियाणा में इस बार यमुना, मारकंडा, घग्गर व टांगरी के अलावा कई बरसाती नदियां व ड्रेन आफत लेकर आईं। प्रदेश के करीब 3,060 गांवों में बाढ़-बारिश से जलभराव हुआ। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर ही 1.84 लाख किसानों ने करीब 11 लाख एकड़ फसलों में नुकसान बता मुआवजा मांगा है। हालांकि, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी कह चुके हैं कि प्रदेश में आपदा जैसी स्थिति नहीं है। कुरुक्षेत्र व अंबाला जिले में नदियां सबसे ज्यादा बार उफान पर आईं। कुरुक्षेत्र में तो मारकंडा, घग्गर के अलावा बरसाती नदी राक्षी भी उफनी। मारकंडा का बांध 3 बार टूट चुका है। कुरुक्षेत्र मुख्यमंत्री नायब सैनी का गृह क्षेत्र है। राक्षी नदी ने उनके हलके लाडवा में ही तटबंध तोड़े। दूसरे नंबर पर अंबाला है। जहां टांगरी दो बार उफान पर आई। मारकंडा, घग्गर, रूण व बेगना किनारों से बाहर आईं।

टांगरी ने सबसे खराब हालात अंबाला कैंट में किए, जो नायब सरकार के नंबर-2 रैंक के मंत्री अनिल विज का गृह क्षेत्र है। सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी का अपना जिला भिवानी और गृह हलका तोशाम भी लगातार जलभराव का संकट झेल रहा है। जबकि यहां कोई नदी भी नहीं है। इस मानसून सीजन में पूर्व सीएम बंसीलाल की कोठी तक भी बरसाती पानी पहुंच गया। यह कोठी भिवानी के विजयनगर में है। किरण चौधरी व श्रुति चौधरी जब भी भिवानी में आती हैं तो इसी कोठी में ठहरती हैं। कोठी तक पानी पहुंचने से रोकने के इंतजाम जरूर हुए हैं। कोठी के पास से मेन रोड की तरफ पानी की निकासी के लिए पाइप लाइन बिछा दी है। उसके बाद यहां ज्यादा जलभराव नहीं हुआ। किस VIP इलाके में क्या हालात और राहत-बचाव के क्या इंतजाम हुए कुरुक्षेत्रः 3 जगह से टूटी मारकंडा, 4 दिन बाद CM ने किया दौरा कुरुक्षेत्र में मारकंडा, सरस्वती, राक्षी और घग्गर नदियां हैं। इनमें मारकंडा डेंजर लेवल 256 मीटर से ऊपर बही।

नैसी गांव में मारकंडा नदी का तटबंध 2 दिन में तीन जगह से टूटा। मारकंडा ने शाहाबाद, झांसा और इस्माइलाबाद में तबाही मचाई। घग्गर नदी उफान पर रही। इससे पिहोवा के पंजाब बॉर्डर से सटे गांवों के खेतों में पानी पहुंच गया। लाडवा में राक्षी नदी का तटबंध 3 सितंबर को 2 जगह से टूटा। कुल मिलाकर जिले में 30 से ज्यादा गांव बाढ़-जलभराव से प्रभावित हुए। करीब 17 हजार एकड़ में फसलें प्रभावित हुईं। शाहाबाद से कांग्रेस विधायक रामकरण काला और पिहोवा से कांग्रेस विधायक मनदीप चट्ठा ने अपने इलाकों में जलभराव का जायजा लिया।

 CM नायब सैनी ने 6 सितंबर को बाढ़ प्रभावित तंगौर, कठवा, कलसाना, झांसा जाते हुए ठोल, नलवी, झरौली खुर्द और झांसा का जायजा लिया। शाहाबाद के रेस्ट हाउस में बाढ़ प्रभावित किसानों से बात की और मार्कण्डेश्वर मंदिर में माथा टेका। इसी दौरान जलभराव वाले इलाकों से रेस्क्यू किए लोगों से बातचीत की। ताजा हालात क्या...मारकंडा का पानी घटा, टूटे बांध रिपेयर नहीं हुए अंबालाः 10 दिन में दो बार उफनी टांगरी, मारकंडा-बेगना सड़कों पर बहीं अंबाला में टांगरी, मारकंडा, बेगना, रूण, घग्गर, ओमला, अमरी समेत कई छोटी नदियां भी हैं।

इस बार सभी में उफान आया। टांगरी नदी की वजह से 10 दिन में दो बार 12 से 15 कॉलोनियों के लोगों को पलायन करना पड़ा। पहली बार टांगरी में 42 हजार क्यूसेक तक पानी दर्ज हुआ जबकि डेंजर लेवल 15 हजार का है। शाहपुर में टांगरी का बांध टूटा। कई साल बाद टांगरी का पानी ओवरफ्लो होकर नेशनल हाईवे-344 तक पहुंचा। कई सड़कें अब नाम की ही बची हैं। अंबाला कैंट विधायक अनिल विज ने कई बार टांगरी नदी क्षेत्र का दौरा किया और लोगों का हालचाल जाना। SDRF की टीम भी रेस्क्यू में लगाई गई। अभी ताजा हालात क्या…इंडस्ट्रियल एरिया 4 दिन बाद भी डूबा, कई सड़कें खत्म भिवानीः कोई नदी भी नहीं, फिर भी 30 से अधिक गांवों में जलभराव भिवानी जिले में कोई भी नदी नहीं आती। इसके बावजूद जिले के 30 से अधिक गांवों में जलभराव की नौबत आई। यहां बरसात के पानी की ही निकासी नहीं हो सकी। इसके अलावा घग्गर ड्रेन ओवरफ्लो हुई है। प्रभावित गांवों में सबसे ज्यादा बवानी खेड़ा, तोशाम व भिवानी ब्लॉक के गांव शामिल हैं। बवानीखेड़ा के विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि ने जलभराव क्षेत्र का दौरा कर मुख्यमंत्री से मुआवजे की मांग की।

तोशाम हलके से विधायक एवं सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी खुद गांवों का दौरा कर चुकी हैं। हालांकि जलभराव का कोई स्थाई-अस्थाई समाधान नहीं हुआ है। पंप सेट लगवाए, लेकिन वो कामयाब नहीं हुए। सबसे बड़ी समस्या ये कि पानी निकालकर छोड़े कहां? ताजा हालात…कई गांवों में एक महीने से भी पानी नहीं उतरा हिसारः 15 जगह टूटी ड्रेन, 276 गांवों में फसलें खराब, बड़े-बड़े नेता पहुंचे हिसार में कोई नदी नहीं है। बारिश का पानी ड्रेनेज के जरिए हिसार में तबाही मचा रहा है। यह ड्रेनेज बरसाती पानी निकालने को बनाई गई हैं, जो सिंचाई में भी प्रयोग होती हैं। मगर बारिश के लगातार होने से ड्रेनेज ओवरफ्लो हो गई हैं। हिसार में अब तक 15 ड्रेनेज टूट गई हैं। हिसार में 307 में से 276 गांवों में फसलें ज्यादा खराब हुई हैं। आदमपुर तहसील के 30, बालसमंद के 19, बरवाला के 28, बांस के 19, हांसी के 43, हिसार के 87, खेड़ी जालब के 17, नारनौंद के 18 और उकलाना तहसील के 15 गांव शामिल हैं।

किसानों ने 1 लाख 45 हजार एकड़ क्षेत्र का खराबा दर्ज कर दिया है। उकलाना से विधायक नरेश सेलवाल, नलवा से रणधीर पनिहार, नारनौंद से जस्सी पेटवाड़, बरवाला से विधायक एवं मंत्री रणबीर गंगवा, हांसी से विनोद भ्याणा, आदमपुर से विधायक चंद्रप्रकाश अपने-अपने क्षेत्र में पहुंचे हैं। सांसद जयप्रकाश, राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला, सांसद कुमारी सैलजा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी इलाके का दौरा किया। 7 सितंबर को सीएम नायब सैनी ने बरवाला, नारनौंद व हांसी के जलभराव वाले इलाकों का दौरा किया। 

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