ताऊ देवीलाल की 112वीं जयंती आज:रोहतक में इनेलो मनाएगी सम्मान दिवस, पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल भी मंच पर दिखेंगे

हरियाणा के पूर्व उपप्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल की 112वीं जयंती आज मनाई जा रही है। इस मौके पर इनेलो रोहतक में सम्मान दिवस समारोह आयोजित कर रही है, जिसमें पार्टी अपनी ताकत दिखाकर राजनीतिक जमीन तलाशने का प्रयास करेगी। रैली को 'रैला' नाम दिया गया है और इसमें प्रदेशभर के साथ-साथ

ताऊ देवीलाल की 112वीं जयंती आज:रोहतक में इनेलो मनाएगी सम्मान दिवस, पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल भी मंच पर दिखेंगे

हरियाणा के पूर्व उपप्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल की 112वीं जयंती आज मनाई जा रही है। इस मौके पर इनेलो रोहतक में सम्मान दिवस समारोह आयोजित कर रही है, जिसमें पार्टी अपनी ताकत दिखाकर राजनीतिक जमीन तलाशने का प्रयास करेगी। रैली को 'रैला' नाम दिया गया है और इसमें प्रदेशभर के साथ-साथ आसपास के राज्यों से भी लोगों के आने की संभावना है। कार्यक्रम में इनेलो के बड़े नेता मौजूद रहेंगे, जबकि मंच पर पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल भी नजर आएंगे।

 सुबह 11 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के लिए विशाल पंडाल, वीआईपी पार्किंग, कूलर-पंखों की व्यवस्था और कार्यकर्ताओं तक संदेश पहुंचाने के लिए 10 बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं। रैली के लिए खास इंतजाम, 3 बड़े पंडाल और VIP व्यवस्था इनेलो ने रोहतक में होने वाली सम्मान दिवस रैली के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की है।

कार्यक्रम स्थल पर तीन बड़े पंडाल बनाए गए हैं, जिनमें कुर्सियों की जगह गद्दे बिछाए गए हैं। गर्मी को देखते हुए पंडालों में कूलर और पंखों की व्यवस्था की गई है। साथ ही, नेताओं के भाषण दूर बैठे कार्यकर्ताओं तक स्पष्ट रूप से पहुंचाने के लिए 10 बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं। देवीलाल की राजनीतिक यात्रा और उपप्रधानमंत्री बनने की कहानी 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल को बहुमत मिला।

इस समय देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। संसद में जब प्रधानमंत्री पद के लिए नाम तय करने की बारी आई तो वीपी सिंह ने पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल का नाम आगे बढ़ाया। देवीलाल उस वक्त हरियाणा के बेहद कद्दावर नेता थे और उनके नाम पर संसद में मौजूद नेताओं की सहमति भी थी। हालांकि, चौधरी देवीलाल ने सभी को चौंकाते हुए खुद प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया।

इसके बजाय उन्होंने वीपी सिंह का नाम प्रस्तावित किया। उनकी इस त्याग की भावना से हर कोई प्रभावित हुआ और वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने। अगले दिन शपथ ग्रहण समारोह में भी देवीलाल ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी लेने के बजाय उन्होंने देश के पहले उपप्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। इस तरह वे भारत के पहले आधिकारिक उपप्रधानमंत्री बने।

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