रोहतक में 13 साल की बेटी ने बनाई शॉर्ट फिल्म:भ्रूण हत्या-बेटी बचाने का रखा कॉन्सेप्ट, सरकार से बेटियों को बचाने की गुहार
रोहतक में बेटी दिवस के अवसर पर 13 साल की लड़की ने समाज को जागरूक करने व बेटियों के प्रति अपना नजरिया बदलने के लिए शॉर्ट फिल्म 'मेरी बेटी मेरी पहचान' बनाई है, जिसे सोशल मीडिया पर ही रिलीज किया है। साथ ही सरकार से बेटियों को बचाने की गुहार भी लगाई है। राम गोपाल कॉलोनी में किराए के मकान में रहने वाले
रोहतक में बेटी दिवस के अवसर पर 13 साल की लड़की ने समाज को जागरूक करने व बेटियों के प्रति अपना नजरिया बदलने के लिए शॉर्ट फिल्म 'मेरी बेटी मेरी पहचान' बनाई है, जिसे सोशल मीडिया पर ही रिलीज किया है। साथ ही सरकार से बेटियों को बचाने की गुहार भी लगाई है। राम गोपाल कॉलोनी में किराए के मकान में रहने वाले हरनंद सांगवान की बेटी दिव्या सांगवान ने छोटी सी उम्र में ही बेटियों के दर्द को समझा।
पिता ने कहा कि बेटी ने कहीं किताब में कन्या भ्रूण हत्या के बारे में पढ़ा तो हमसे जिज्ञासावश इसके बारे में पूछ लिया। दिव्या ने कन्या भ्रूण हत्या के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठी की और हाल ही में हुए मनीषा की मौत मामले जैसी घटनाओं के बारे में भी जानकारी जुटाई। एक दिन दिव्या ने अपने पिता हरनंद से कहा कि क्यों ना समाज को जागरूक करने के लिए कुछ किया जाए। बेटियों के प्रति समाज का नजरिया बदलने का प्रयास किया जाए। शॉर्ट फिल्म बनाने का दिव्या ने दिया आइडिया हरनंद सांगवान ने बताया कि शॉर्ट बनाने का आइडिया दिव्या का ही था, जिसके लिए उन्होंने काम किया।
जब उन्हें चोट लगी तो वह घर में बैठे-बैठे इसी विषय पर स्टोरी लिखने लगे और उसे मूर्त रूप अब दिया, ताकि समाज को एक अच्छी चीज देखने को मिल सके। शॉर्ट फिल्म बनाने में आया डेढ़ लाख का खर्च हरनंद सांगवान ने बताया कि शॉर्ट फिल्म बनाने में करीब डेढ़ लाख रुपए का खर्च आया। कुछ कलाकारों को बाहर से भी शामिल किया है और उनकी बेटी दिव्या ने इसमें अहम रोल निभाया। इस शॉर्ट फिल्म में उन्होंने काम किया। समाजसेवी नवीन जयहिंद के हाथों शॉर्ट फिल्म को रिलीज करवाया गया है। मैं और जुल्म पापा ना सह पाऊंगी शॉर्ट फिल्म का गाना लोगों के दिल को छू लेने वाला है। फिल्म के बोल हैं कि मैं और जुल्म पापा ना सह पाउंगी।
मैने बेरा सै तू बेटी सै, है जगत की शान, लेकिन तू आगी तो मैं शर्म तै मर जाऊं, इसीलिए बेटी की जगह मैं बेटा ही चाहूं, मैं अपने बेटे को अपना वारिश बनाऊ। 11 साल की उम्र में खेल चुकी नेशनल गेम्स दिव्या सांगवान का जन्म 3 सितंबर 2012 को हुआ और मात्र 11 साल की उम्र में नेशनल खेलो इंडिया के तहत फरीदाबाद में 2023 में हुए किक बॉक्सिंग खेल में गोल्ड व ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं।
छोटी सी उम्र में ही समाज की बुराइयों को लेकर भी काफी गहन चर्चा परिवार के साथ करती हैं। ईपीएफओ विभाग में कार्यरत हरनंद सांगवान दिव्या के पिता हरनंद सांगवान ईपीएफओ विभाग में कार्यरत हैं और विभागीय कबड्डी टीम के कप्तान भी है। साथ ही क्रिकेट भी खेलते हैं और बीसीसीआई की तरफ से आयोजित टूर्नामेंट में दो साल से खेल रहे हैं। जब रायपुर में कबड्डी के दौरान चोट लगी, तो इस शॉर्ट फिल्म की स्टोरी लिख डाली।



