रोहतक में कांग्रेस ने सूरजमल किलोई को दिया टिकट:विधानसभा चुनाव से पहले छोड़ी थी भाजपा, 2005 से राजनीति में सक्रिय
हरियाणा के रोहतक में कांग्रेस ने मेयर पद के उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। भाजपा के रामअवतार वाल्मीकि के सामने कांग्रेस ने 20 साल से राजनीति में सक्रिय सूरजमल किलोई को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। अब भाजपा और कांग्रेस के बीच मेयर पद का मुकाबला रोचक हो गया है। सूरजमल किलोई 2005 में पहली बार नगर परिषद के सदस्य चुने गए थे।
हरियाणा के रोहतक में कांग्रेस ने मेयर पद के उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। भाजपा के रामअवतार वाल्मीकि के सामने कांग्रेस ने 20 साल से राजनीति में सक्रिय सूरजमल किलोई को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। अब भाजपा और कांग्रेस के बीच मेयर पद का मुकाबला रोचक हो गया है। सूरजमल किलोई 2005 में पहली बार नगर परिषद के सदस्य चुने गए थे। इसके बाद 2013 में रोहतक नगर निगम बना तो पार्षद की सीट महिला आरक्षित कर दी गई। ऐसे में सूरजमल ने अपनी पत्नी पूनम को चुनाव मैदान में उतारा और लगातार दो बार पार्षद चुनी गई।
2024 में विधानसभा का टिकट न मिलने पर छोड़ी भाजपा सूरजमल किलोई को पुराना कांग्रेसी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। सूरजमल 2005 से लेकर 2015 तक कांग्रेस में रहे। इसके बाद भाजपा सरकार में शामिल हो गए और लगातार 10 वर्षों तक कलानौर क्षेत्र में सक्रिय राजनीति करते रहे। लेकिन जब 2024 में कलानौर विधानसभा की टिकट नहीं मिला तो भाजपा छोड़कर दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए। भूपेंद्र हुड्डा के खास हैं सूरजमल सूरजमल किलोई की बात करें तो कांग्रेस में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खास माने जा रहे है। विधानसभा चुनाव से लेकर कांग्रेस के अब तक हुए कार्यक्रमों में सूरजमल को भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ देखा गया है। कांग्रेस से टिकट मिलने में भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा का ही हाथ रहा है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच होगी कड़ी टक्कर सूरजमल किलोई को कांग्रेस उम्मीदवार घोषित करने के बाद अब मेयर का चुनाव रोचक हो गया है। भाजपा की तरफ से वरिष्ठ नेता रामअवतार वाल्मीकि के सामने कांग्रेस के सूरजमल किलोई के आने से मेयर चुनाव में उठक-पठक देखने को मिलेगी। दोनों अनुसूचित जाति के बड़े चेहरे मेयर पद के लिए भाजपा और कांग्रेस की तरफ से अनुसूचित जाति के दोनों बड़ों चेहरों को मैदान में उतारा गया है। रामअवतार वाल्मीकि के जरिए भाजपा जहां दलितों को सामने में लगी है। वहीं कांग्रेस ने सूरजमल को उतारकर न केवल दलितों को बल्कि हुड्डा के गढ़ को सुरक्षित रखने का प्रयास भी किया है।
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