हिसार यूनिवर्सिटी में मारपीट करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर को झटका:1 घंटे की बहस के बाद जमानत याचिका खारिज, 2 स्टूडेंट के सिर फोड़े थे
हरियाणा के हिसार में स्थित हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (HAU) के स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज के मामले में गिरफ्तार किए गए असिस्टेंट प्रोफेसर राधेश्याम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। प्रोफेसर राधेश्याम ने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिस पर आज, शुक्रवार को सुनवाई हुई।
हरियाणा के हिसार में स्थित हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (HAU) के स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज के मामले में गिरफ्तार किए गए असिस्टेंट प्रोफेसर राधेश्याम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। प्रोफेसर राधेश्याम ने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिस पर आज, शुक्रवार को सुनवाई हुई। असिस्टेंट प्रोफेसर का स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज का एक वीडियो भी सामने आया था। स्टूडेंट्स के वकीलों ने कोर्ट में लाठीचार्ज के वीडियो और उनकी मेडिकल रिपोर्ट दिखाई। एक घंटे बहस के बाद कोर्ट ने राधेश्याम की याचिका खारिज कर दी। वहीं, यूनिवर्सिटी में गुरुवार रात को जमकर बवाल हुआ।
यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने कहा कि उन्हें शुक्रवार तक हॉस्टल खाली करने के लिए कहा था। मगर, उन्हें गुरुवार रात को ही वार्डन ने हॉस्टल खाली करने को कहा। इसके बाद उनको मेस में खाना नहीं मिला। इसके अलावा रात में ही हॉस्टल का पानी भी बंद कर दिया गया। इस दौरान छात्राएं विरोध और नारेबाजी करते हुए नजर आईं। यूनिवर्सिटी ने कहा- यह कोई नया आदेश नहीं मामला यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप बढ़ाने की मांग के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा है। इसे लेकर स्टूडेंट्स और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के बीच झड़प भी हो चुकी है। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि हर साल समर वेकेशन में हॉस्टल खाली कराए जाते हैं। यह कोई नया आदेश नहीं है। छात्राओं के वीडियो सामने आने के बाद विरोधी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय चौटाला और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने इस मामले में सरकार से सवाल पूछे हैं कि ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ की बात कहने वाले छात्राओं के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं? हिसार यूनिवर्सिटी में हॉस्टल खाली कराने से जुड़ा पूरा मामला... दिन में 2 बार मैसेज भेजे, सभी लड़कियां हॉस्टल खाली कर दें पहला मैसेज: छात्राओं के वॉट्सऐप ग्रुप से यह मैसेज शेयर किए हैं, जो वार्डन निधि कंबोज के नाम से पोस्ट हुए हैं। छात्राओं का कहना है कि गुरुवार (26 जून) को पहले मैसेज सुबह 10 बजकर 35 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट के बीच शेयर किए गए। इनमें कहा गया कि सेकेंड और थर्ड ईयर की सभी छात्राएं हॉस्टल का कमरा छोड़ते वक्त अपना सामान ले जाएं, अन्यथा कोई इसका जिम्मेदार नहीं होगा। इसे मोस्ट अर्जेंट मानने को कहा गया। पोस्ट ग्रेजुएट के स्टूडेंट्स को भी सामान ले जाने को कहा गया। दूसरा मैसेज: यह मैसेज दोपहर में 1 बजकर 21 मिनट से 1 बजकर 54 मिनट के भीतर शेयर किए गए। जिसमें कहा गया कि कल सभी ग्रेजुएशन स्टूूडेंट्स हॉस्टल खाली कर दें और अपना सामान ले जाएं।
किसी को भी हॉस्टल में रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी। जो स्टूडेंट घर गए हुए हैं, वह भी सामान ले जाएं वर्ना हम जिम्मेदार नहीं होंगे। कल सुबह से मेस भी बंद कर दी जाएगी। पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स में भी सिर्फ उन्हीं को हॉस्टल में रहने की इजाजत मिलेगी, जिनके पास इसकी परमिशन है। वॉट्सऐप ग्रुप में डाले मैसेज रात वार्डन ने बुलाकर भी कहा, हॉस्टल खाली कर दो छात्राओं का कहना है कि शुक्रवार रात को जब वह खाना खाने के लिए मेस में गईं तो उस वक्त उन्हें खाना नहीं मिला। इसके बाद वह वार्डन से मिलने गईं, जिस पर वार्डन ने कहा कि उन्हें हॉस्टल खाली करना होगा। मेरे पास ऊपर से ऑर्डर हैं। हॉस्टल वार्डन और छात्राओं के बीच हुई बातचीत.... छात्राएं - मैम, आप मेस बंद करने के लिए बोल रहे हो। हॉस्टल भी बंद हो जाएगा तो कहां रहेंगे। मेस बंद होगा तो खाना मैम। वार्डन - अपना अरेंजमेंट कर ले आना। मेस बंद हो जाएगी। अभी यही आदेश है कि हॉस्टल खाली करवा लो। अब आप से हॉस्टल खाली करवाएंगे। जब एक्जाम डेट आएगा। उससे एक दिन पहले आपको डेट मिल जाएगी। क्या पता डिले हो जाएं। वहीं की मेस चलेगा, वहीं का सब कुछ होगा। इसलिए अपना सामान लेकर जाओ।
जितनी जरूरत होगी, उतना ले आना। छात्राएं - मैम सेशन तो चल ही रहा है अभी। पढ़ने के लिए घर थोड़ी जाएंगे। वार्डन - मुझे क्या पता। मैं अपने आप से नहीं बोल रही ये बात। हमें ऊपर से आई है ये बात कि सेशन खत्म हो चुका है। रि-शेड्यूल होंगे तुम्हारे एक्जाम। थोड़े दिन बाद वापस आ जाना। अभी तुम खाली करके जाओ। छात्राएं - हम एक बार बात कर लेते हैं। वार्डन - किसी से भी बात कर ले बेटा। हमें यही बोला गया है, हम उन्हीं के ऑर्डर फॉलो कर रहे हैं। ठीक है बेटे। हम भी अपने से थोप नहीं रहे बेटे। हम भी सुबह से मीटिंगों में बैठे हैं। जो भी चेंज होगा, वो इन्फॉर्म कर दिया जाएगा। ठीक है। मेरा पर्सनल कुछ नहीं है इसमें। जो बहुत दूर से हैं और ले ही नहीं जा सकता। वो एक रूम में अपना सामान रख दें। अपना फोन नंबर दे दो। हर रूम में सामान रखा हो ऐसा नहीं चलेगा। मेस के लिए दो-तीन दिन की राहत दी है।
छात्राएं - हम समझ रहे हैं मैडम। अभी सेशन शुरू ही नहीं हुआ, खत्म हो गया। वार्डन - हमारे पास जो ऑर्डर है, उस हिसाब से सेशन खत्म है। जो पेपर थे, वो हो गए। अगर रि-शेड्यूल होंगे तो वो तुम्हारे फेवर में होंगे। मेरा कोई रोल नहीं है। मेरा किसी से पर्सनल दुश्मनी नहीं है। जैसे ऑर्डर आए हैं, वैसे ही मैंने आपको बोल दिया है। मेरी जगह बैठकर देखो, तभी सब चीजें समझ में आएंगी। हॉस्टल खाली करने को लेकर छात्राओं ने क्या कहा इस बारे में धरना दे रही छात्राओं ने बताया कि 25 जून दोपहर से ही उन पर हॉस्टल खाली कराने का दबाव बनाया जाने लगा था। कल 26 जून, वीरवार को दोपहर लंच के बाद रात डिनर बंद कर दिया था। जबकि हमें गुरुवार को मैसेज देकर शुक्रवार तक का टाइम दिया गया था। शुक्रवार रात को कुछ छात्राएं हॉस्टलों में चली गईं तो कुछ बाहर रह गईं। इसके बावजूद हॉस्टल के बाहरी ओर का गेट बंद कर दिया। जो छात्राएं अंदर थी, उनको खाना नहीं मिला। यहां तक कि बाहर से खाना अंदर देने के लिए भी गेट नहीं खोला गया। रात एक बजे तक वह खाने के लिए चिल्लाती रहीं। इसके बाद पुलिस आई। पुलिस ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से बात की तो अंदर जाने दिया। फिर भी उन्हें खाना नहीं मिला।



