मोबिक्विक एप अपडेट के वक्त सिक्योरिटी चेक डिसेबल हुआ; यूजर्स ने निकाले 40 करोड़

हरियाणा की गुरुग्राम बेस्ड डिजिटल पेमेंट कंपनी मोबिक्विक के खाते से यूजर्स द्वारा अवैध तरीके से 40 करोड़ रुपए निकालने की जांच चल रही है। इस अवैध ट्रांजैक्शन के कारण नूंह, पलवल व गुरुग्राम जिलों में कई लोग रातों-रात लखपति बन गए थे। अब कंपनी अपने पैसे वापस लेने के लिए रिकवरी कैंप लगा रही है।

मोबिक्विक एप अपडेट के वक्त सिक्योरिटी चेक डिसेबल हुआ; यूजर्स ने निकाले 40 करोड़

हरियाणा की गुरुग्राम बेस्ड डिजिटल पेमेंट कंपनी मोबिक्विक के खाते से यूजर्स द्वारा अवैध तरीके से 40 करोड़ रुपए निकालने की जांच चल रही है। इस अवैध ट्रांजैक्शन के कारण नूंह, पलवल व गुरुग्राम जिलों में कई लोग रातों-रात लखपति बन गए थे। अब कंपनी अपने पैसे वापस लेने के लिए रिकवरी कैंप लगा रही है। इस मामले में कंपनी की शिकायत पर गुरुग्राम के सेक्टर-53 की पुलिस ने नूंह के 5 व पलवल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। ये सभी कंपनी एप यूजर्स हैं। कंपनी अब तक करीब 2500 खाते फ्रीज कर चुकी है। इनमें से ज्यादातर व्यापारी व दुकानदारों के खाते हैं।

सबसे ज्यादा रकम नूंह जिले से निकाली गई। कंपनी ने नूंह के लघु सचिवालय के कमरा नंबर 428 में 23 सितंबर तक के लिए कैंप लगाया है। जिन लोगों ने वॉलेट से पैसे निकाले हैं, उनके एक मौका दिया है। रकम न लौटाने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सॉफ्टवेयर अपडेट करते वक्त गलती हुई। जिससे सिक्योरिटी चेक डिसेबल हो गया। कंपनी की वार्षिक मीटिंग होने वाली है, उसी को लेकर ऑडिट चल रहा था और तकनीकी टीम भी रात को काम कर रही थी। इसी दौरान सिस्टम फेल हुआ। कंपनी की टेक्निकल टीम जांच कर रही है।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को लिखा-कंपनी के कर्मी की मिलीभगत नहीं इस वित्तीय अनियमितता पर मोबिक्विक कंपनी को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) व नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को भी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी है। सेबी शेयर बाज़ार और वित्तीय बाजारों की निगरानी और नियंत्रण करती है। सेबी को भेजी 2 पेज की सूचना में कंपनी ने दावा किया कि इस मामले में कंपनी के किसी कर्मचारी की कोई मिलीभगत नहीं है।

अब सिलसिलेवार पढ़ें…एक रात में कई लोग लखपति बने और कैसे मामला पकड़ में आया अपडेट के दौरान 3 स्टेप का सिक्योरिटी बाइपास हुआ मोबिक्विक ने एक सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया, जिसमें टेक्निकल गड़बड़ी की वजह से सिक्योरिटी का बाइपास हो गया। यानी एप अपडेट के वक्त सिक्योरिटी चेक डिसेबल हो गया। इसमें 3 स्टेप ओपन हो गए। जिससे ट्रांजेक्शन अनसक्सेसफुल होने के बावजूद सक्सेसफुल ​​​​​ दिखाए जा रहे थे। किसी यूजर के पास पर्याप्त बैलेंस न होने पर भी पैसा ट्रांसफर हो रहा था। यूजर द्वारा गलत यूपीआई पिन डालने पर भी ट्रांजैक्शन सफल हो रहा था।

11-12 सितंबर को करीब 48 घंटे में 40 करोड़ की रकम निकली यह सिक्योरिटी चेक डिसेबल 11-12 सितंबर के बीच हुआ। यानी करीब 48 घंटे बाद कंपनी की पकड़ में यह मामला आया। तब तक कंपनी के अकाउंट से 40 करोड़ रुपए निकाल लिए गए। ये ट्रांजेक्शन UPI से हुई। खास बात ये है कि ये सिर्फ हरियाणा के 3 जिलों नूंह, पलवल और गुरुग्राम में ही हुआ। सबसे ज्यादा पैसा नूंह में निकाला गया। साइबर फ्रॉड के मामले में नूंह की तुलना वैसे ही जामताड़ा से होती है। झारखंड का जिला जामताड़ा ऑनलाइन साइबर क्राइम, खासकर "फिशिंग" घोटालों के कारण पूरे देश में बदनाम यहां ओटीपी, यूपीआई, केवाईसी के जरिए फ्रॉड होते हैं। 12 सितंबर को इंटरनल ऑडिट में गड़बड़ी पकड़ी कंपनी की 12 सितंबर को हुई इंटरनल ऑडिट में यह मामला पकड़ में आया।

खासकर इस वजह से कि हरियाणा के एक लिमिटेड एरिया में काफी ट्रांजेक्शन हुईं थी। इसके तुरंत बाद कंपनी ने डिटिल सिक्योरिटी के इंतजाम शुरू किए। उन खातों का रिकॉर्ड निकाला गया, जिनमें ट्रांजेक्शन हुए या पैसे निकाले गए। अपडेट के दौरान हुए उस ग्लिच को भी ठीक किया गया, जिसका फायदा कुछ लोगों ने उठाया। कंपनी ने 13 सितंबर को गुरुग्राम पुलिस को शिकायत दी। साइबर फ्रॉड का भी अंदेशा…क्योंकि अकेले नूंह में ही 30 करोड़ आए मोबिक्विक एप के जरिए हुए 40 करोड रुपए का अवैध ट्रांजेक्शन में से अकेले नूंह में ही 30 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है।

बाकी 10 करोड़ रुपए गुरुग्राम और पलवल जिले में गए। इस जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले में साइबर फ्रॉड के अंदेशे या कंपनी कर्मियों की मिलीभगत से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। इस एंगल से भी जांच हो रही है। इसके पीछे एक बड़ी वजह ये भी हो सकती है कि नूंह के करीब 80 फीसदी दुकानदार-व्यापारी मोबिक्विक एप का इस्तेमाल करते हैं। अभी तक 6 गिरफ्तार, खातों में 8 करोड़ फ्रीज कराए गुरुग्राम पुलिस प्रवक्ता अशोक कुमार के मुताबिक अभी 6 गिरफ्तारियां हुई हैं। इनमें मेवात के गांव रेवासन के रेहान, गांव कामेडा के वकार यूनुस, गांव मरोड़ा के वकीम अकरम, कामेड़ा के मोहम्मद आमिर व मोहम्मद अंसार और पलवल के उटावड़ थाना क्षेत्र का मोहम्मद शकील शामिल हैं।

ढाई हजार खाते फ्रीज कराए गए हैं, इनमें 8 करोड़ की रकम है। अभी जांच चल रही है। अगर मोबिक्विक कंपनी का कोई कर्मी भी संलिप्त पाया जाता है, तो उस पर भी कार्रवाई होगी। नूंह के ही 6000 खाते संदेह के घेरे में हैं। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को ये 7 बातें स्पष्ट की इस वित्तीय अनियमितता को लेकर मोबिक्विक की कंपनी सेक्रेटरी अंकिता शर्मा की ओर से 16 सितंबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को 7 पॉइंट्स पर स्थिति स्पष्ट की गई। पहला- फ्रॉड की नेचर क्या हरियाणा के सीमित क्षेत्र के कुछ रजिस्टर्ड मर्चेंट व यूजर्स ने आपस में मिलकर धोखे से कंपनी से पैसे ले लिए, ताकि उन्हें गलत तरीके से फायदा मिल सके।

दूसरा-कंपनी पर असर क्या कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जिन लोगों ने गलत तरीके से सेटलमेंट किया। रिकवरी के प्रयास किए जा रहे हैं। तीसरा- ये हुआ कब यह संभवत 11-12 सितंबर को हुआ। यह अनुमानित समय है। जांच चल रही है। चौथा- इसमें कौन शामिल है कंपनी के कुछ रजिस्टर्ड व्यापारी और यूजर, जो हरियाणा के कुछ चुनिंदा इलाकों से थे। इसमें कंपनी का कोई भी कर्मचारी, उच्च पदाधिकारी (KMP) या अंदरूनी व्यक्ति शामिल नहीं था।

पांचवां-अनुमानित कितनी रकम है प्रारंभिक जानकारी के आधार पर और जोखिम को कम करने के लिए ₹40 करोड़ की राशि को लेकर FIR दर्ज कराई गई। कंपनी ने लगभग ₹14 करोड़ की राशि वापस ले ली है। अनुमानित कुल नुकसान ₹26 करोड़ है। छठा- धोखाधड़ी, चूक या गिरफ्तारी की सूचना है हां, गुरुग्राम के थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं।

सातवां- ऐसी धोखाधड़ी/चूक के बाद उठाए गए सुधारात्मक कदम कानूनी प्रवर्तन एजेंसी (LEA) ने उन सभी बैंक खातों पर डेबिट-फ्रीज और लीएन मार्क लगाकर सक्रिय कदम उठाए हैं, जहां अनधिकृत भुगतान किए गए थे। ग्राहकों से रिकवरी की जा रही है। कंपनी के शेयरों पर भी पड़ा असर 17 सितंबर को मोबिक्विक के शेयरों में 2.4% की गिरावट आई, जो ₹303.90 पर आ गए। कंपनी के शेयरों में यह गिरावट निवेशकों के बीच चिंता का संकेत है।

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