रोहतक की कलानौर विधानसभा से भाजपा की उम्मीदवार रेनू डाबला ने कलानौर की विधायिका शकुंतला खटक पर निशाना साधा।

रोहतक की कलानौर विधानसभा से भाजपा की उम्मीदवार रेनू डाबला ने कलानौर की विधायिका शकुंतला खटक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शकुंतला खटक ने 15 साल में जनता की आवाज नहीं उठाई, जिसके कारण लोग नाराज हैं। वहीं उनको टिकट मिलने से पार्टी के नेताओं की नाराजगी पर भी चुटकी ली।

रोहतक की कलानौर विधानसभा से भाजपा की उम्मीदवार रेनू डाबला ने कलानौर की विधायिका शकुंतला खटक पर निशाना साधा।

रोहतक की कलानौर विधानसभा से भाजपा की उम्मीदवार रेनू डाबला ने कलानौर की विधायिका शकुंतला खटक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शकुंतला खटक ने 15 साल में जनता की आवाज नहीं उठाई, जिसके कारण लोग नाराज हैं। वहीं उनको टिकट मिलने से पार्टी के नेताओं की नाराजगी पर भी चुटकी ली। रेनू डाबला ने कहा कि पार्टी छोड़ने वालों ने खुद को नुकसान किया है। जो भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता हैं, वे ऐसा कभी फैसला नहीं लेते। 13 उम्मीदवार मैदान में कलानौर विधानसभा से कांग्रेस की प्रत्याशी शकुंतला खटक 3 बार की विधायक हैं। जिन्हें कांग्रेस ने चौथी बार उम्मीदवार बनाया है। वहीं भाजपा ने पूर्व मेयर रेनू डाबला को अपना उम्मीदवार बनाया है। कलानौर विधानसभा से कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। रेनू डाबला से बातचीत सवाल : किन मुद्दों को लेकर प्रचार कर रही हैं? रेनू डाबला : भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों को लेकर लोगों के बीच जाया जा रहा है।

भाजपा ने जो संकल्प पत्र जारी किया है, उसको लेकर जनता के बीच जा रही हैं। सवाल : 3 बार की विधायक से मुकाबला है और पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं। क्या देखती हैं ? रेनू डाबला : कांग्रेस से 3 बार की विधायक है। चुनाव को चुनाव की तरह से ही लड़ना ठीक रहता है। कभी किसी को कमजोर समझना ठीक नहीं रहता। जनता के मन से चमत्कार होते हैं। सवाल : किन कारणों से खुद को बेहतर मानती हैं ? रेनू डाबला : 2 या 3 उम्मीदवार हैं तो उनकी ख़ासियत देखी जाती है। जनता एक तरीके से थोड़ा सोचती है। जिसको व्यवहार व काम करने का तरिका पसंद आता है तो उसे चुना जाता है। सवाल : कलानौर विधायक 15 साल से हैं, उन्होंने क्या काम किए ? क्या लगता है ? रेनू डाबला : कलानौर विधानसभा क्षेत्र में जहां तक कामों की बात है, तो 10 साल से भाजपा की सरकार है। भाजपा ने कभी असमानता का काम कभी नहीं किया। चाहे सरकार के विधायक थे या ना थे। अगर कहीं जनता को दुख है तो इस बात का है कि कलानौर की विधायिका उनकी आवाज नहीं बन पाई। उनकी बातें व समस्याएं व सुख-दुख थे, वे कमजोर महसूस करवाते हैं। कलानौर की जनता ने मन बनाया है कि उन्हें सशक्त विधायक चाहिए। जो उनकी आवाज चंडीगढ़ जाकर विधानसभा में पहुंचा सके।

 सवाल : निर्दलीय व अन्य उम्मीदवारों का चुनाव पर क्या असर पड़ेगा ? रेनू डाबला : प्रजातंत्र में सभी को अपनी बात रखने और चुनाव लड़ने का अधिकार है। सभी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं। यह एक प्रतिस्पर्धा है और यह हेल्दी प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। विधानसभा चुनाव में जीत तो एक की ही होगी। सवाल : पहला चुनाव है और भाजपा ने क्यों भरोसा किया ? रेनू डाबला : भाजपा संगठन की पार्टी है और संगठन इतना मजबूत है कि जब भी कोई निर्णय लेना होता है तो संगठन में बूथ के व्यक्ति से लेकर प्रधानमंत्री तक की चर्चा की जाती है। सवाल: टिकट मिलने पर कुछ भाजपा नेताओं ने विरोध किया और पार्टी भी छोड़ी। नाराज कार्यकर्ताओं को कैसे हैंडल कर पाएंगी ? रेनू डाबला : भाजपा एक ऐसी पार्टी है, जहां संगठन का फैसला ही सर्वोपरि होता है। जो संगठन से खुद को ऊंचा मानता है। उसकी नहीं बनती है। जितने भी भाजपा कार्यकर्ता हैं, उनकी कोई नाराजगी नहीं हैं। जब तब टिकटों की घोषणा नहीं हुई थी, तब तक हमारे बीच में एक हेल्दी प्रतिस्पर्धा थी। जैसे ही लिस्ट में नाम आया तो सभी ने स्वार्थ भुलाकर आगे बढ़कर संगठन का काम करने का संकल्प लिया है। जो पार्टी छोड़कर गए हैं, उन्होंने खुद का नुकसान किया है। इतनी बड़ी पार्टी में प्रदेश स्तर का नेता छोड़कर जाता है तो यह अपने स्टेटस को डाउन करने वाली बात है।

सवाल : इससे पार्टी को नुकसान हुआ है? रेनू डाबला : पार्टी को नुकसान नहीं हुआ। यहां समर्पित कार्यकर्ता हैं। जहां समर्पित कार्यकर्ता होते हैं, वे कभी ऐसा फैसला नहीं लेते हैं। भाजपा के संगठन में पहली बात यही सिखाई जाती है कि आप समर्पित होना सीखें। सवाल: कलानौर विधायक शकुंतला खटक के 15 साल के कार्यकाल को कैसे देखती है ? रेनू डाबला : उनके 15 साल के कार्यकाल में से 5 साल का समय तो कांग्रेस सरकार में भी रहा। लोगों के बीच जो असंतोष है उनके प्रति उससे कहीं ना कहीं पता चलता है कि वे लोगों की जो आशाएं थी, उन पर खरा उतर नहीं पाई। उनके बीच जाकर अपनापन था वह दिखा नहीं पाई। जनता अब परिवर्तन की ओर हैं। भाजपा ही नहीं कांग्रेस के कार्यकर्ता भी यह कहते हैं कि अब बदलाव होना चाहिए।

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